Monday, October 6, 2008

रमजान मुबारक ....

रमजान मुबारक ....


कल न्यू मार्केट में भटक रहा था । छोले-भठूरे खाने के लिए । अचानक पास वाली मस्जिद में अजान सुनाई दी । और फ़िर पता नही कहाँ से कानों को एक रूहानी आवाज़ मिली "रमजान की इब्तेदा हो गई"





इस्लामिक केलेंडर के इस नौवें महीने का धार्मिक महत्त्व जितना है , उससे सांस्कृतिक महत्त्व भी उससे कम नही है। इसे महसूस करने के लिए आपका मुस्लिम होना भी ज़रूरी नही । फलक पर चाँद की दीद होने का इंतज़ार करते किसी मुसलमां की रूह को चाँद दिखाई देने पर जितना करार आता होगा , आप उससे गले लग कर "रमजान मुबारक" के अल्फाज़ कह कर देखें - उतना ही चैन न सिर्फ़ आपकी बल्कि हिंदुस्तान की रूह को भी मिलेगा ।

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